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    Wednesday, February 20, 2019

    UPTET 69000 SHIKSHAK BHARTI : आचार संहिता में नियुक्तियां लटकने के आसार


    राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : 68500 शिक्षक भर्ती के दूसरे रिजल्ट में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति लटकने के आसार हैं। शासन ने तेजी नहीं दिखाई तो लोकसभा चुनाव के बाद ही साढ़े हजार से अधिक तैनाती हो सकेगी, क्योंकि मार्च माह के पहले सप्ताह में ही चुनाव की आचार संहिता लागू होने के आसार हैं। बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव डा. प्रभात कुमार रिजल्ट के तीन दिन बाद नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कराने का एलान जरूर कर चुके हैं।
    असल में, बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षक भर्ती नियुक्ति की रफ्तार बहुत धीमी है। पांच माह किसी तरह रिजल्ट आया। रविवार को सफल अभ्यर्थियों की संख्या बताई गई, सोमवार को वेबसाइट पर अंक अपलोड हुए हैं। अभी परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से चयनित अभ्यर्थियों की सूची बेसिक शिक्षा परिषद मुख्यालय भेजी नहीं गई है। संकेत हैं कि 4688 की सूची बुधवार शाम या फिर गुरुवार को जाएगी। इसके बाद परिषद शासन से प्रक्रिया शुरू करने का मार्गदर्शन लेगा। ऑफलाइन या ऑनलाइन आवेदन लेकर चयनितों का जिला आवंटन होगा। इसके बाद काउंसिलिंग तब नियुक्ति पत्र निर्गत करके विद्यालय दिया जाएगा। इसमें कम से कम एक पखवारे का समय लगना तय है। इसी दौरान चुनाव की आचार संहिता प्रभावी होने की उम्मीद जताई जा रही है। अफसरों का यह भी मत है कि प्रक्रिया शुरू होने के बाद आचार संहिता से वह नहीं रुकेगी। वहीं कुछ अफसर कहते हैं कि नियुक्ति का प्रकरण है इसलिए चुनाव आयोग से अनुमति लेना जरूरी होगा और आयोग नियुक्तियों में अनुमति देता नहीं है। परिषद सचिव रूबी सिंह का कहना है कि उन्हें चयन सूची का इंतजार है। उसे तत्काल भेजेंगे मार्गदर्शन लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शासन इस भर्ती को लेकर खासा गंभीर है। इसलिए ज्यादा समय नहीं लगेगा। भर्ती का दूसरा परिणाम आने के दो दिन पहले अपर मुख्य सचिव डा. कुमार कह चुके हैं कि रिजल्ट के तीसरे दिन से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करा देंगे।
    राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : शिक्षक भर्ती के पहले रिजल्ट में जिन मेधावियों को फेल करार दिया गया, उनमें से कई का परिणाम दूसरे रिजल्ट में भी दुरुस्त नहीं हो सका है, जबकि उन्हें कॉपी पर अच्छे अंक हासिल हुए हैं। खास बात यह है कि उच्च स्तरीय जांच समिति ने सबसे पहले उनकी अनदेखी की, फिर परीक्षा संस्था ने भी मुंह मोड़ लिया है। अच्छे अंक पाने के बाद भी वे रिजल्ट व चयन सूची दोनों से बाहर हैं। अब वह कोर्ट जाने को मजबूर हैं।
    भर्ती का पहला परिणाम 13 अगस्त को आने के बाद मेधावी अभ्यर्थी खासे आहत थे, क्योंकि वे फेल घोषित किए गए। इन्हीं के विरोध पर उच्च स्तरीय जांच हुई उसी बीच अभ्यर्थियों ने दो हजार रुपये शुल्क अदा करके स्कैन कॉपी हासिल की। उसमें ऐसे अभ्यर्थी भी सामने आए जो कॉपी पर दर्ज अंकों से परीक्षा उत्तीर्ण होते हुए फेल घोषित कर दिए गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि उच्च स्तरीय समिति ने जिन 51 अभ्यर्थियों को कॉपी पर उत्तीर्ण पाकर नियुक्त करने का निर्देश दिया है, उनमें वह भी शामिल होंगे।
    पांच अक्टूबर के शासनादेश पर 23 अक्टूबर को चयन सूची बनी इसमें परीक्षा संस्था ने 51 की जगह 45 को ही चयन के उपयुक्त पाया और सूची परिषद मुख्यालय को भेज दी गई। परीक्षा संस्था ने प्रत्यावेदन लेकर आश्वस्त किया कि पुनमरूल्यांकन में उनका ध्यान रखा जाएगा। अभ्यर्थियों की मानें तो उन्होंने याची बनकर दोबारा मूल्यांकन के लिए आवेदन किया। इसमें भी छह अभ्यर्थियों का नाम पुनमरूल्यांकन के परिणाम में शामिल नहीं है। बाकी 13 अभ्यर्थी दोबारा परिणाम में चयनित हो रहे हैं। अच्छे अंक पाकर चयन सूची से बाहर होने पर वे अब बेहद निराश हैं और अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
    राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : शिक्षक भर्ती के दूसरे परिणाम में अभ्यर्थियों को उन उत्तरों पर भी अंक हासिल हो गए, जो कटिंग करके लिखे गए या फिर जिनके जवाब में वर्तनी आदि की अशुद्धियां थी। इसीलिए सफल होने वालों का आंकड़ा साढ़े चार हजार को पार गया। इतना सब होने के बाद भी सैकड़ों अभ्यर्थी अब भी संतुष्ट नहीं हैं।
    तमाम अभ्यर्थियों के असहमति की मुख्य वजह दोबारा मूल्यांकन का नियम आवेदन के बाद बदल जाना है। असल में, शासन ने पुनमरूल्यांकन के लिए अभ्यर्थियों से 10 से 20 सितंबर तक ऑनलाइन आवेदन लिए थे। उस समय तक यही कहा जा रहा था कि कटिंग, ओवर राइटिंग और गलत वर्तनी पर अंक नहीं मिलेंगे, क्योंकि भर्ती के शासनादेश में ऐसे ही नियम बने थे।
    आवेदन पूरा होना के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि कटिंग, ओवर राइटिंग और प्रश्नों के जवाब की यदि वर्तनी भी गलत है तब भी अंक दिए जाएं। इस पर भी अभ्यर्थी मौन रहे लेकिन, दूसरे रिजल्ट में 4688 के सफल होने पर वे अभ्यर्थी खासे निराश हैं, जो चंद अंकों से अनुत्तीर्ण हुए और पुनमरूल्यांकन के लिए इसलिए आवेदन नहीं किया कि उन्हें कटिंग आदि पर अंक नहीं मिलेंगे। ऐसे अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा संस्था ने जब कॉपी के मूल्यांकन का मानक बदला था तो नए सिरे से दोबारा मूल्यांकन के लिए आवेदन लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया इससे वे शिक्षक बनने से चूक गए हैं। अब ये अभ्यर्थी कॉपी के दोबारा मूल्यांकन के लिए कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं।
    वहीं, ऐसे भी अभ्यर्थी भी कोर्ट जा रहे हैं जो दोबारा मूल्यांकन में भी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सके हैं। उनका कहना है कि पुनमरूल्यांकन में पक्षपात किया गया है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा था कि यदि पुनर्मूल्यांकन में गड़बड़ी होती है तो फिर सुनवाई करेंगे। उधर, परीक्षा संस्था की ओर से कहा गया है कि दोबारा मूल्यांकन एससीईआरटी में हुआ है। इसमें उनका कोई रोल नहीं है।

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