UPTET 69000 SHIKSHAK BHARTI : पूर्व सचिव सुत्ता सिंह के फिर निलंबित होने के आसार

राज्य ब्यूरो, प्रयागराज : परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की पूर्व सचिव सुत्ता सिंह को भले ही चंद दिन पहले हाईकोर्ट ने राहत दी लेकिन, उस आदेश के अमल का उन्होंने तरीका अपनाया उससे शासन बेहद खफा है। अब नए सिरे से निलंबन होने की तलवार लटक गई है, साथ ही अनुशासनिक कार्रवाई होना भी तय माना जा रहा है। ऐसे संकेत हैं कि शासन इस दिशा में जल्द कार्रवाई करेगा, क्योंकि लोकसभा चुनाव के ऐन मौके पर जबरन प्रभार ग्रहण से सरकार की भी किरकिरी हो गई है।

बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 68500 सहायक अध्यापकों की लिखित परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप पर निलंबित हुई पूर्व सचिव सुत्ता सिंह की एक बार फिर शासन के निशाने पर आ गई हैं। उन्हें हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 14 मार्च को निलंबन आदेश पर स्थगनादेश देकर बड़ी राहत दी लेकिन, इस पर अमल कराने का उन्होंने जो तरीका अपनाया उसे शासन के अफसर व सरकार खफा हो गई है। नियमानुसार उन्हें कोर्ट के आदेश की प्रति विभागीय अफसरों के जरिए शासन को भेजकर अग्रिम आदेश लेना चाहिए था। इसके बजाए वह सीधे परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पहुंचकर जबरन प्रभार ग्रहण करने लगीं।

अफसरों का कहना है कि कोर्ट ने उन्हें यह आदेश नहीं दिया था कि वे सचिव के पद पर काबिज हो जाएं। उनकी तैनाती कहां होगी यह शासन को तय करना था। इसका इंतजार न करके वह खुद की नीति नियंता बन बैठी।

शासन ने सोमवार को ही मौजूदा सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी से पूरी रिपोर्ट मांगी थी। उसके बाद मंगलवार को एक और रिपोर्ट उन अधिकारी व कर्मचारियों की मांगी गई है, जो प्रभार प्रमाणपत्र जारी करने के समय कार्यालय में थे। उनके बयान लेकर विस्तृत रिपोर्ट फिर भेजी गई है। इसमें अधिकारी व कर्मचारियों ने कहा कि पूर्व सचिव ने डराया और धमकाया है। जिस तरह से मौके की रिपोर्ट मांगी है, उससे संकेत साफ है कि सरकार बड़ी कार्रवाई करने का आधार तैयार कर रही है। अनुशासनहीनता प्रथम दृष्टया साबित हो रहा है, अब नए सिरे से निलंबन होना भी तय माना जा रहा है।