UPTGT PGT विषय नहीं तो क्यों की शिक्षक भर्ती

विधि संवाददाता, प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा व सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद उप्र प्रयागराज से 14 मार्च तक व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि जब माध्यमिक स्कूलों में बायोलॉजी विषय नहीं है तो 1998 के शासनादेश के तहत 2016 से पहले तक इस विषय के अध्यापकों की भर्ती क्यों की गई, जबकि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से निकाली गई टीजीटी 2016 के भर्ती विज्ञापन में बोर्ड ने यह कहते हुए विज्ञापित बायोलॉजी के 304 पद वापस ले लिए कि स्कूलों में प्रशिक्षित स्नातक बायोलॉजी का पद सरकार ने सृजित ही नहीं किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने प्रयागराज के राजबहादुर व 10 अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में वर्ष 2016 की बायोलॉजी विषय के अध्यापक भर्ती को विज्ञापन से वापस लेने की वैधता को चुनौती दी गई है। याची का कहना है कि जब 1998 के शासनादेश से विषय का पद नहीं होने पर भर्ती नहीं किए जाने का आदेश है तो इसके पहले तक की भर्तियों में इसका पालन क्यों नहीं किया गया और साथ ही जब हाईस्कूल व इंटर में बायोलॉजी अलग विषय है तो अध्यापक की भर्ती क्यों नहीं की जानी चाहिए। याचिका की सुनवाई अब 14 मार्च को होगी।

कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति पर निर्णय ले सरकार : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नगर पालिका परिषद खुर्जा में छह साल से खाली कार्यपालक अधिकारी के पद पर शीघ्र नियुक्ति करने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने डॉ बिशन स्वरूप शर्मा की जनहित याचिका पर दिया है।

याची का कहना है कि कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से एसडीएम को चार्ज सौंपा गया है। नगर पालिका अधिनियम के तहत नगर की सफाई का दायित्व कार्यपालक अधिकारी का है। स्थायी अधिकारी की नियुक्ति नहीं होने से नागरिक अधिकारों की पूर्ति नहीं हो रही है।

याची ने राज्य सरकार से लगातार शिकायत की है। लेकिन, खाली पद भरने पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को कार्यपालक अधिकारी की तैनाती पर यथाशीघ्र निर्णय लेने का निर्देश देते हुए याचिका निस्तारित कर दी है।